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Monday, May 29, 2017

वीडियो: छत्तीसगढ़ में नैरोगेज ट्रेन यात्रा

पिछले दिनों छत्तीसगढ़ में की गयी नैरोगेज ट्रेन यात्रा की छोटी-छोटी वीडियो जो जोड़ने और एडिट करने का यह प्रयास किया है। उतना प्रभावशाली तो नहीं है, लेकिन ठीक-ठाक ही है। मैं वीडियो एडिटिंग के क्षेत्र में नया हूँ ना... इसलिये। जब लगातार एडिटिंग करनी शुरू कर दूँगा, तो आपको ‘स्टनिंग’ वीडियो देखने को मिला करेंगी...
याद रखना इस बात को...

Thursday, May 25, 2017

छत्तीसगढ़ में नैरोगेज ट्रेन यात्रा

29 अप्रैल 2017 को अचानक ख़बर मिली कि छत्तीसगढ़ की एकमात्र नैरोगेज रेलवे लाइन और भी छोटी होने जा रही है। किसी ज़माने में रायपुर जंक्शन से ट्रेनें आरंभ होती थीं, लेकिन पिछले कई सालों से तेलीबांधा से ट्रेनें चल रही हैं। रायपुर जंक्शन और तेलीबांधा के बीच में रायपुर सिटी स्टेशन था, जहाँ अब कोई ट्रेन नहीं जाती।
तो ख़बर मिली कि 1 मई से यानी परसों से ये ट्रेनें तेलीबांधा की बजाय केन्द्री से चला करेंगी। यानी तेलीबांधा से केन्द्री तक की रेलवे लाइन बंद हो जायेगी और इनके बीच में पड़ने वाले माना और भटगाँव स्टेशन भी बंद हो जायेंगे। मैं इसलिये भी बेचैन हो गया कि रायपुर से केन्द्री तक इस लाइन का गेज परिवर्तन नहीं किया जायेगा। इसके बजाय रायपुर से मन्दिर हसौद और नया रायपुर होते हुए नयी ब्रॉड़गेज लाइन केन्द्री तक बनायी जा रही है। केन्द्री से आगे धमतरी और राजिम तक गेज परिवर्तन किया जायेगा। केन्द्री तक का यह नैरोगेज का मार्ग रायपुर प्रशासन को सौंप दिया जायेगा, जहाँ हाईवे बनाया जायेगा।
अब जबकि केन्द्री तक नैरोगेज की यह लाइन बंद हो ही जायेगी, तो कभी भी इस पर हाईवे बनाने का काम आरंभ हो सकता है। यानी रायपुर सिटी, तेलीबांधा, माना और भटगाँव स्टेशन हमेशा के लिये समाप्त हो जायेंगे। मुझे उनके फोटो लेने की उत्कंठा हो गयी और 3 मई 2017 को मैं दिल्ली से निकल पड़ा। हालाँकि ट्रेन बंद हो चुकी थी, इसलिये मोटरसाइकिल से या किसी भी तरीके से बंद हो चुके स्टेशनों तक जाऊँगा और उनके फोटो लूँगा।

Monday, May 22, 2017

धनबाद-राँची पैसेंजर रेलयात्रा


पिछले दिनों अचानक दिल्ली के दैनिक भास्कर में ख़बर आने लगी कि झारखंड़ में एक रेलवे लाइन बंद होने जा रही है, तो मन बेचैन हो उठा। इससे पहले कि यह लाइन बंद हो, इस पर यात्रा कर लेनी चाहिये। यह लाइन थी डी.सी. लाइन अर्थात धनबाद-चंद्रपुरा लाइन। यह रेलवे लाइन ब्रॉड़गेज है। इसका अर्थ है कि इसे गेज परिवर्तन के लिये बंद नहीं किया जायेगा। यह स्थायी रूप से बंद हो जायेगी।
झरिया कोलफ़ील्ड़ का नाम आपने सुना होगा। धनबाद के आसपास का इलाका कोयलांचल कहलाता है। पूरे देश का कितना कोयला यहाँ निकलता है, यह तो नहीं पता, लेकिन देश की ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा करने में इस इलाके का अहम योगदान है। इधर आप जाओगे, आपको हर तरफ़ कोयला ही कोयला दिखेगा। कोयले की भरी हुई मालगाड़ियाँ अपनी बारी का इंतज़ार करती दिखेंगी। इसलिये यहाँ रेलवे लाइनों का जाल बिछा हुआ है। कुछ पर यात्री गाड़ियाँ भी चलती हैं, लेकिन वर्चस्व मालगाड़ियों का ही है।

Friday, May 19, 2017

वीडियो - हुसैनीवाला में बैसाखी मेला और साल में एक दिन चलने वाली ट्रेन

मैं इस वीड़ियो को उतना शानदार तो नहीं बना पाया, लेकिन फिर भी ठीक ही है। पंजाब के फ़िरोज़पुर जिले में पाकिस्तान सीमा के एकदम नज़दीक स्थित है हुसैनीवाला। आज़ादी से पहले यहाँ से होकर ट्रेनें लाहौर जाया करती थीं। लेकिन अब केवल साल में एक ही दिन ट्रेन चलती है। फ़िरोज़पुर छावनी से हुसैनीवाला तक। बैसाखी वाले दिन। इस दिन यहाँ भगत सिंह, राजगुरू और सुखदेव के समाधि-स्थल पर मेला लगता है। उसके उपलक्ष्य में रेलवे ट्रेन चलाता है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु जाते हैं। सतलुज नदी पार करके समाधि-स्थल पहुँचकर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।
इसके अलावा यहाँ सतलुज पर बने रेल के पुल के अवशेष भी आकर्षण के केंद्र हैं।

Thursday, May 18, 2017

हुसैनीवाला में बैसाखी मेला और रेलवे

हुसैनीवाला की कहानी कहाँ से शुरू करूँ? अभी तक मैं यही मानता आ रहा था कि यहाँ साल में केवल एक ही दिन ट्रेन चलती है, लेकिन जैसे-जैसे मैं इसके बारे में पढ़ता जा रहा हूँ, नये-नये पन्ने खुलते जा रहे हैं। फिर भी कहीं से तो शुरूआत करनी पड़ेगी।
इसकी कहानी जानने के लिये हमें जाना पड़ेगा 1931 में। भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरू को लाहौर षड़यंत्र केस व अन्य कई मामलों में गिरफ़्तार करके फाँसी की सज़ा घोषित की जा चुकी थी। तय था कि 24 मार्च को इन्हें लाहौर जेल में फाँसी दे दी जायेगी। लेकिन उधर जनसाधारण में देशभक्ति की भावना भी भरी हुई थी और अंग्रेजों को डर था कि शायद भीड़ बेकाबू न हो जाये। तो उन्होंने एक दिन पहले ही इन तीनों को फाँसी दे दी - 23 मार्च की शाम सात बजे। जेल के पिछवाड़े की दीवार तोड़ी गयी और गुपचुप इनके शरीर को हुसैनीवाला में सतलुज किनारे लाकर जला दिया गया। रात में जब ग्रामीणों ने इधर अर्थी जलती देखी, तो संदेह हुआ। ग्रामीण पहुँचे तो अंग्रेज लाशों को अधजली छोड़कर ही भाग गये। लाशों को पहचान तो लिया ही गया था। इसके बाद ग्रामीणों ने पूर्ण विधान से इनका क्रिया-कर्म किया। आज उसी स्थान पर समाधि स्थल बना हुआ है। प्रत्येक वर्ष बैसाखी वाले दिन यानी 13 अप्रैल को यहाँ मेला लगता है।
भारत-पाकिस्तान की सीमा एकदम बगल से होकर गुज़रती है। जिस पुल से हम सतलुज नदी पार करते हैं, उसके पश्चिम में पाकिस्तान ही है। यहीं नदी पर बैराज भी है। एक नहर भी निकाली गयी है। नदी बैराज और पुल के नीचे से गुजरते ही पाकिस्तान में चली जाती है।

Monday, May 15, 2017

उत्तरकाशी में रणविजय सिंह की फोटोग्राफी

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पिछले दिनों जब रणविजय सिंह के साथ उत्तरकाशी और रैथल जाना हुआ, तो एक नयी बात पता चली। रणविजय ने बताया कि मुझसे प्रेरित होकर उन्होंने फोटोग्राफी आरंभ की थी। मुझसे प्रेरित होकर कैसे? बताता हूँ। 
बहुत पहले ‘डायरी के पन्नों’ में यदा-कदा मैं फोटोग्राफी के टिप्स भी बता दिया करता था। वहीं से इन्होंने कुछ टिप्स सीखे। आज हालत यह है कि ‘गुरू गुड़ ही रह गया, चेला चीनी हो गया’। बहुत अच्छी फोटोग्राफी है रणविजय की। इनकी फेसबुक वॉल पर इनके शानदार फोटो देखे जा सकते हैं। साधारण दृश्यों को असाधारण बनाना रणविजय से सीखा जा सकता है। तो इसी बात से प्रेरित होकर मैंने उनसे उनके उत्तरकाशी के फोटो मंगाये। मैंने कहा था कि गिने-चुने सर्वोत्तम फोटो ही भेजो, लेकिन उन्होंने 50-60 फोटो भेज दिये। तो इन्हीं में से कुछ चुनिंदा फोटो आज प्रकाशित कर रहा हूँ। 

Monday, May 8, 2017

उत्तरकाशी में रैथल गाँव का भ्रमण

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6 अप्रैल 2017,
पंकज कुशवाल जी रैथल के रहने वाले हैं, तो उन्होंने हमें रैथल जाने के लिये प्रेरित किया। रैथल के ऊपर दयारा बुग्याल है। तो ज़ाहिर है कि दयारा का एक रास्ता रैथल से भी जाता है। दयारा बहुत बड़ा बुग्याल है और इसके नीचे कई गाँव हैं। सबसे प्रसिद्ध है बरसू। रैथल भी प्रसिद्ध होने लगा है। और भी गाँव होंगे, जहाँ से दयारा का रास्ता जाता है, लेकिन उतने प्रसिद्ध नहीं।
आज हमें रैथल ही रुकना था, तो सोचा कि क्यों न भटवाड़ी से 15 किलोमीटर आगे गंगनानी में गर्म पानी में नहाकर आया जाये। हमें नहाये कई दिन हो गये थे। इस बहाने नहा भी लेंगे और नया अनुभव भी मिलेगा। तो जब भटवाड़ी की ओर जा रहे थे तो रास्ते में और भी दूरियाँ लिखी दिखायी पड़ीं। इनमें जिस स्थान ने हमारा सबसे ज्यादा ध्यान आकर्षित किया, वो था हरसिल - गंगनानी से 30 किलोमीटर आगे। हम दोनों का मन ललचा गया और हम ख्वाब देखने लगे हरसिल में चारों ओर बर्फ़ीले पहाड़ों के बीच बैठकर चाय और आलू की पकौड़ियाँ खाने के। कार में ही बैठे बैठे हमने गंगोत्री तक जाने के सपने देख लिये। अप्रैल में - कपाट खुलने से भी पहले - गंगोत्री। रणविजय ने कहा कि हमने आज पंकज जी को रैथल का वचन दे रखा है। मैंने कहा - वचन तोड़ने में एक फोन भर करना होता है।

Thursday, May 4, 2017

उत्तरकाशी भ्रमण: पंकज कुशवाल, तिलक सोनी और चौरंगीखाल

4 अप्रैल, 2017
आज की हमारी फ्लाइट की बुकिंग थी दिल्ली से बागडोगरा की। पिछले साल सस्ती फ्लाइट का एक डिस्काउंट ऑफ़र आया था। तब बिना ज्यादा सोचे-समझे मैंने अपनी और दीप्ति की बुकिंग कर ली। सोचा कि अप्रैल में सिक्किम घूमेंगे और गोईचा-ला ट्रैक करेंगे। सिक्किम बुराँश की विभिन्न प्रजातियों के लिये प्रसिद्ध है और बुराँश के खिलने का समय भी अप्रैल ही होता है। लेकिन पिछले एक महीने से दीप्ति अपनी एक ट्रेनिंग में इस कदर व्यस्त है कि उसका इस यात्रा पर जाना रद्द हो गया।
लेकिन फ्लाइट तो नॉन-रिफंडेबल थी। तब विचार बना कि न्यूजलपाईगुड़ी से शुरू करके गुवाहाटी, तिनसुकिया और मुरकंगसेलेक तक रेलयात्रा कर लूँगा। वैसे भी असोम में मौसम अच्छा था। जबकि शेष भारत में गर्मी का प्रकोप शुरू हो चुका था। तो रेल के माध्यम से असोम घूमना बुरा नहीं होता। सारी योजना बना ली। कब कहाँ से कौन-सी ट्रेन पकड़नी है, कहाँ रुकना है आदि।
लेकिन ऐन टाइम पर साहब लोग धोखा दे गये। छुट्टियाँ नहीं मिलीं। मैं छुट्टियों के मामले में ऑफिस में ज़िद नहीं करता हूँ। इस बार नहीं मिलीं, कोई बात नहीं। अगली बार इनसे भी ज्यादा मिल जायेंगी। तो इस तरह पूर्वोत्तर जाना रह गया।

Monday, May 1, 2017

आंबलियासन से विजापुर मीटरगेज रेलबस यात्रा

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19 मार्च, 2017
मैं महेसाणा स्टेशन पर था - “विजापुर का टिकट देना।” 
क्लर्क ने दो बार कन्फर्म किया - “बीजापुर? बीजापुर?” 
नहीं विजापुर। वी जे एफ। तब उसे कम्प्यूटर में विजापुर स्टेशन मिला और 15 रुपये का टिकट दे दिया।
अंदाज़ा हो गया कि इस मार्ग पर भीड़ नहीं मिलने वाली।
प्लेटफार्म एक पर पहुँचा तो डी.एम.यू. कहीं भी नहीं दिखी। प्लेटफार्म एक खाली था, दो पर वीरमगाम पैसेंजर खड़ी थी। फिर एक मालगाड़ी खड़ी थी। क्या पता उसके उस तरफ डी.एम.यू. खड़ी हो। मैं सीढ़ियों की और बढ़ने लगा। बहुत सारे लोग पैदल पटरियाँ पार कर रहे थे, लेकिन जिस तरह हेलमेट ज़रूरी है, उसी तरह स्टेशन पर सीढियाँ।

Thursday, April 27, 2017

गुजरात मीटरगेज ट्रेन यात्रा: बोटाद से गांधीग्राम

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18 मार्च 2017
पहले तो योजना थी कि आज पूरे दिन भावनगर में रुकूँगा और विमलेश जी जहाँ ले जायेंगे, जाऊँगा। उन्होंने मेरे लिये बड़ी-बड़ी योजनाएँ बना रखी थीं और रेलवे के कारखाने में मेरे एक लेक्चर की भी प्लानिंग थी। लेकिन जब मुझे पता चला कि आंबलियासन से विजापुर वाली मीटरगेज की लाइन चालू है और उस पर रेलबस भी चलती है, तो मेरा मन बदल गया। अगर इस बार उस लाइन पर यात्रा नहीं की तो पता नहीं कब इधर आना हो और कौन जाने तब तक वो लाइन बंद भी हो जाये। विजापुर से आदरज मोटी, कलोल से महेसाणा और अहमदाबाद से खेड़ब्रह्म वाली लाइनें पहले ही बंद हो चुकी हैं। गेज परिवर्तन का कार्य जोरों पर चल रहा है।
यही बात विमलेश जी को बतायी तो वे इसके लिये तुरंत राज़ी हो गये। तय हुआ कि आज बोटाद से अहमदाबाद तक यात्रा करूँगा और कल आंबलियासन से विजापुर। बोटाद से अहमदाबाद जाने के लिये दो बजे वाली ट्रेन पकडूँगा और यहाँ भावनगर से बोटाद के लिये साढ़े ग्यारह वाली। यानी आज साढ़े ग्यारह बजे तक हमारे पास समय रहेगा विमलेश जी के कारखाने में घूमने का। बाइक उठायी और निकल पड़े।

Monday, April 24, 2017

गुजरात मीटरगेज ट्रेन यात्रा: जूनागढ़ से देलवाड़ा

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17 मार्च 2017
रात अच्छी नींद आयी। एक चूहे ने एक बार आसपास चहलकदमी की, एक दो डरावने सपने आये: फिर भी सब ठीक रहा। इतने बड़े रेस्ट हाउस में मैं अकेला ही था। भूतों के अस्तित्व को मैं मानता हूँ। रेलवे लाइन के किनारे बने इस सुनसान रेस्ट हाउस में भूत रहते होंगे, इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता। धन्यवाद भूतों, मुझे शांति से सोने देने के लिए।
जूनागढ़ से ट्रेन ठीक समय पर चल दी। भीड़ बिल्कुल नहीं थी। जैसे ही शहर से बाहर निकले, गिरनार पर्वत दिखायी पड़ने लगा। काफ़ी ऊँचा पर्वत है और जूनागढ़ के साथ-साथ गुजरात का भी बहुत बड़ा धार्मिक आस्था का केंद्र है। दूर से ही नमस्कार किया - भविष्य में दीप्ति के साथ आने का वादा करके।
वीसावदर में हमारी ट्रेन पहुँचने के बाद खिजडिया-जूनागढ़ पैसेंजर आ गयी। लग रहा था कि अब हमारी ट्रेन खाली हो जाएगी, लेकिन खिजडिया ट्रेन के आधे से ज्यादा यात्री इसमें चढ़ गए। सभी सीटें भर गयीं और कुछ यात्री खड़े भी रहे। मैं कल इस मार्ग पर यात्रा कर चुका था, इसलिए मेरे काम पर इस भीड़ का उतना प्रभाव नहीं पड़ा।

Thursday, April 20, 2017

गिर फोरेस्ट रेलवे: ढसा से वेरावल

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दो घंटे ढसा में खड़ी रहकर यही ट्रेन अब वेरावल के लिये चल दी। ढसा से ब्रॉड़गेज की एक लाइन भावनगर जाती है और एक महुवा। ट्रेन चली तो एक कंटेनर ट्रेन महुवा की ओर जाती दिखी। धीरे-धीरे मीटरगेज की ट्रेन सरक रही थी, थोड़ी ही दूरी पर य्यै लंबी कंटेनर ट्रेन। बड़ा शानदार दृश्य था यह। मैं इसमें इतना खो गया कि फोटो लेना भी याद नहीं रहा। हालाँकि एक-दो फोटो जाती-जाती के ले ज़रूर लिये।
अमरेली स्टेशन पर एक सूचना-पट्ट लगा हुआ था, जिस पर पीली बैकग्राउंड में काले अक्षरों में ताज़ा ही लिखा हुआ था - आरक्षण चार्ट। मैं चौंक गया। अरे, यह क्या लिख दिया इन्होने? अमरेली में आरक्षण चार्ट? गिनी चुनी दो तीन पैसेंजर ट्रेनें आती हैं - जनरल डिब्बों वाली। जिसने भी यह काम करवाया है, उसने बीस रूपये का काम कराके हज़ार का बिल बनाया होगा।
फेसबुक पेज पर एक लाइव वीडियो चला दी। यार लोग खुश हो गए। पूछने लगे कहाँ का है, कहाँ का है। उनसे अगर बता देता कि अमरेली का है तो कोई भी यह पता लगाने की ज़हमत नहीं उठाता कि अमरेली है कहाँ। उल्टा मुझसे ही पूछते।

Monday, April 17, 2017

गुजरात मीटरगेज रेल यात्रा: जेतलसर से ढसा

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अंधा क्या माँगे? मुझे ट्रेन में जो बर्थ सबसे ज्यादा पसंद है, वो है अपर बर्थ। आप अपने बैग से कई सामान अपने इर्द गिर्द फैला सकते हैं और चोरी होने व गिरने का डर भी नहीं। मोबाइल को कान के पास रख रकते हैं, कोने में पानी की बोतल, मोबाइल के पास बैटरी बैंक, थोड़ा नीचे कैमरा, केले या अंगूर। यह उन्मुक्तता किसी दूसरी बर्थ पर नहीं मिलती। वरीयता क्रम में इसके बाद मिड़ल बर्थ, लोअर बर्थ, साइड़ अपर और साइड़ लोअर। साइड़ लोअर भले ही पाँचवे नंबर पर हो, लेकिन इसका यह अर्थ नहीं कि यह मुझे पाँचवे नंबर पर पसंद है। बल्कि यह बर्थ मुझे सबसे ज्यादा नापसंद है।
और आज जब चार्ट बना तो आर.ए.सी. क्लियर होने के बाद मुझे मिली 39 नंबर की बर्थ - साइड़ लोअर। मैं इस पर जाकर दो अन्य लोगों के बीच जगह बनाता हुआ बैठ गया और इंतज़ार करने लगा कि कोई आये और मुझसे किसी भी बर्थ के बदले बदली कर ले। ज्यादा देर प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ी और आठ मुसलमानों के दल के एक सदस्य ने जैसे ही अपनी कहानी सुनानी शुरू की, मैंने तपाक से कहा - “हाँ, बदल लूँगा। कौन-सी बर्थ पर जाना है?” उन्होंने कहा - “22 नंबर पर।” सेकंड का हजारवाँ हिस्सा भी नहीं लगा, गणना करने में कि 22 नंबर वाली बर्थ अपर बर्थ होती है - मेरी पसंद में पहले स्थान पर। उन्होंने मुझे चार बार उसी मीठे गुजराती लहजे में शुकिया कहा, मैंने भी अपने लहजे में दो बार धन्यवाद कह दिया।

Thursday, April 13, 2017

गुजरात मीटरगेज रेल यात्रा: अहमदाबाद से रणुंज

14 मार्च 2017
जब से मेरठ-सहारनपुर रेलवे लाइन बिजली वाली हुई है और इस पर बिजली वाले इंजन, बिजली वाली ट्रेनें चलने लगी हैं, गोल्डन टेम्पल मेल में डीजल इंजन लगना बंद हो गया है। निजामुद्दीन में इंजनों की अदला-बदली होती थी, तो यहाँ इस ट्रेन के लिए तीस मिनट का ठहराव निर्धारित था, लेकिन अब इसे घटाकर पंद्रह मिनट कर दिया गया है। पहले यह सात बजकर पैंतीस पर निजामुद्दीन से चलती थी, जबकि अब सात बीस पर ही चल देती है। सात बजे मेरी नाईट ड्यूटी समाप्त होती है, तो इन बीस मिनटों में निजामुद्दीन कैसे पहुँचा, यह बात केवल मैं और धीरज ही जानते हैं। धीरज बाइक लेकर वापस चला गया, मैं निजामुद्दीन रह गया। जब फुट ओवर ब्रिज पर तेजी से प्लेटफार्म नंबर एक की और जा रहा था, तो एक गाड़ी की सीटी बजने लगी थी और वह गाड़ी थी - गोल्डन टेम्पल मेल।

Monday, April 10, 2017

एक विचित्र रेल-यात्रा

7 मार्च 2017
आला हज़रत एक्सप्रेस को इज़्ज़तदार ट्रेन नहीं माना जाता। भुज और बरेली के बीच चलने वाली इस ट्रेन का ज्यादा समय राजस्थान में गुज़रता है। आप किसी राजस्थानी से, ख़ासकर इसके मार्ग में आने वाले राजस्थानी से पूछिए इसके बारे में। वह इसे थकी हुई और बेकार ट्रेन बताएगा। और यह बेकार इस मायने में है कि इसमें भीड़ बहुत होती है। इतनी भीड़ कि सामान्य और शयनयान डिब्बों में ज्यादा अंतर नहीं होता।
ट्रेन आधा घंटा लेट थी और जब मैं पुरानी दिल्ली के छह नंबर प्लेटफार्म पर सीढ़ियों से उतर रहा था तो ट्रेन भी धीरे-धीरे चल रही थी। पता चलना मुश्किल था कि ट्रेन आ रही है या आने के बाद चल चुकी है। लेकिन इस थकी हुई ट्रेन की थकी हुई सवारियों का दरवाजों पर खड़े होना ही कह रहा था कि ट्रेन अभी-अभी आयी है। प्लेटफार्म पर भी काफी भीड़ थी और रुकने से पहले ही उतरने वालों और चढ़ने वालों का संघर्ष शुरू हो गया। 
जब सब शांत हो गया तो मैं डिब्बे में चढ़ा - एस चार में। सैंतीस नंबर वाली शायिका मेरी थी। यह मध्य शायिका होती है और दिन में किसी काम की नहीं होती। मैं इस बात को जानता था और किसी भी बहस के लिए तैयार नहीं था। अपने कूपे में बारह लोगों को बैठे देख चुपचाप अपने लिए जगह बनायी और सिकुड़कर बैठ गया। ऊपर वाली बर्थों पर लोग सोये हुए थे। नीचे वाले बैठे-बैठे ऊँघ रहे थे।

Thursday, April 6, 2017

अंडमान यात्रा की कुछ वीडियो

अंडमान यात्रा की छोटी-छोटी वीडियो पिछले दिनों फेसबुक पेज पर प्रकाशित की गयी थीं। उन्हें ही यहाँ इकट्ठा प्रकाशित कर दिया है। यदि आपने ये वीडियो पहले देख ली हों, तो अब देखने की आवश्यकता नहीं हैं। क्यों अपना डाटा खर्च करना? नहीं देखी हों तो आप देख सकते हैं।


Monday, April 3, 2017

वंडूर बीच भ्रमण

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23 जनवरी 2017
आज हमारी अंडमान यात्रा का आख़िरी दिन था और दिन का भी आख़िरी वक़्त चल रहा था। हम सीधे पहुँचे वंडूर बीच पर। पोर्ट ब्लेयर से यहाँ तक बहुत सारी बसें भी चलती हैं। एक जगह लिखा था - महात्मा गाँधी मरीन नेशनल पार्क में स्वागत है। आप इधर के नक्शे को देखेंगे तो पायेंगे कि यहाँ छोटे-छोटे कई द्वीप हैं। ये सभी द्वीप निर्जन हैं और सामुद्रिक पारिस्थितिकी में महत्वपूर्ण हैं। इनमें सबसे प्रसिद्ध है जॉली ब्वाय द्वीप। जॉली ब्वाय की बोट यहीं वंडूर से चलती है। हमारे पास समय की कमी थी, इसलिये वहाँ नहीं गये।
वंडूर बीच के पास ही लोहाबैरक क्रोकोडायल सेंचुरी है। जगह-जगह चेतावनी भी लिखी थी कि यहाँ तक मगरमच्छ आ जाते हैं, इसलिये सावधान रहें।
भीड़ बिल्कुल नहीं थी। जितने पर्यटक थे, लगभग उतने ही कुत्ते भी थे। एक बहुत बड़ा ठूँठ पड़ा था, जो यात्रियों के लिये फोटो-पॉइंट था। हमारे लिये भी।

Thursday, March 30, 2017

अंडमान में बाइक यात्रा: माउंट हैरियट नेशनल पार्क

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23 जनवरी, 2017
तो हम बंबू-फ्लैट पहुँच गये। बढ़िया रोचक नाम है - बंबू-फ्लैट। यहाँ से चाथम बहुत नज़दीक है और नियमित बोट चलती हैं। हम बोट में रखकर भी बाइक को इधर ला सकते थे, लेकिन अंडमान की सड़कों को भी नापना चाहते थे। बंबू-फ्लैट से थोड़ा आगे एक तिराहा है, जहाँ से एक रास्ता नोर्थ-बे जाता है। रास्ता टूटा-फूटा था, लेकिन शायद बाइक तो चली ही जाती होगी। हम कुछ दिन पहले नोर्थ-बे जा चुके थे, तो आज वहाँ जाने की आवश्यकता नहीं थी।
25-25 रुपये की हमारी और 20 रुपये की बाइक की पर्ची कटी। आख़िरी दो-तीन किलोमीटर तक चढ़ाई बड़ी जोरदार है, लेकिन सड़क अच्छी बनी है। रास्ता - ऑफ़ कोर्स - घने जंगल से होकर गुज़रता है। फिर एक जगह पार्किंग है और बाइक यहीं खड़ी करके हम आगे चल दिये।

Monday, March 27, 2017

अंडमान में बाइक यात्रा: चाथम आरा मशीन

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23 जनवरी, 2017
आज जो सबसे पहला काम किया, वो था किराये पर बाइक लेना। अबरडीन बाज़ार में एक दुकान से बाइक मिल गयी - 500 रुपये प्रतिदिन किराया और 2000 रुपये सुरक्षा-राशि, जो बाइक लौटाने पर वापस कर दी जायेगी।
हमारे मोबाइल में नेट नहीं चल रहा था, इसलिये गूगल मैप लोड़ नहीं हो पाया। मेरी इच्छा बाइक से माउंट हैरियट जाने की थी। हैरियट के लिये पहले अंडमान ट्रंक रोड़ पर चलना होता है, वही सड़क जो डिगलीपुर जाती है। फिर कहीं से दाहिने मुड़कर बड़ी लंबी दूरी तय करके हैरियट जाना होता है। लेकिन नक्शे के अभाव में हम पहुँच गये चाथम। अब जब चाथम पहुँच ही गये तो यहाँ की आरा मिल भी देख लें। मैं एक मैकेनिकल इंजीनियर हूँ। इस तरह की पता नहीं कितनी मिलों की विजिट कर रखी है, इसलिये यह मेरे लिये एक उत्पादन इकाई से ज्यादा कुछ नहीं थी, लेकिन आजकल यह एक पर्यटक स्थल है।
एक बुढ़िया पुल से पहले चौराहे पर स्टूल पर डिब्बा रखकर इडली बेच रही थी। हमें चाहिये सस्ता भोजन और यहाँ से सस्ता कहीं नहीं मिल सकता था। दो प्लेट इडली ले ली। लेकिन दोनों प्लेटों में कम से कम दस बाल निकले। हमने बाल छोड़ दिये और इडली खा ली। और करते भी क्या? इडली थोड़े ही छोड़ते?

Thursday, March 23, 2017

हैवलॉक द्वीप - गोविंदनगर बीच और वापस पॉर्ट ब्लेयर

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22 जनवरी, 2017
‘पानो इको रिसॉर्ट’ में हम ठहरे थे। यह गोविंदनगर बीच के बिल्कुल बगल में है। अच्छा बना हुआ है।
हैवलॉक से हमें आज शाम को निकलना था, लेकिन बोट की बुकिंग न मिल पाने के कारण सुबह वाली बोट में ही बुकिंग करनी पड़ी थी। इस तरह हैवलॉक जैसे खूबसूरत स्थान को देखने के लिये हमारे पास चौबीस घंटे भी नहीं थे। कल राधानगर बीच देख लिया, आज बगल में मौज़ूद गोविंदनगर को देख लेते हैं।
हम नहाने की तैयारी के साथ गये थे, लेकिन जब कोरल चट्टानें देखीं तो नहाने का इरादा त्याग दिया। पानी एकदम शांत था। बड़ी दूर तक पानी में गहराई भी नहीं थी। इक्का-दुक्का पर्यटक ही थे। उनमें भी कई स्कूबा डाइविंग के लिये जाने वाले थे। हमें इस तरह की ‘एक्टिविटी’ रास नहीं आतीं। परसों स्नॉरकलिंग कर ली, बहुत हो गया।

Monday, March 20, 2017

राधानगर बीच @ हैवलॉक द्वीप

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21 जनवरी 2017
वही जहाज जिससे हम कल नील द्वीप आये थे, हमें आज हैवलॉक ले जायेगा। आज सुबह साढ़े सात बजे यह पॉर्ट ब्लेयर से चलेगा और साढ़े नौ बजे नील आ जायेगा। आधे घंटे बाद हैवलॉक के लिये प्रस्थान कर जायेगा।
यहाँ सुबह जल्दी हो जाती है, लेकिन अपनी आदत वही आठ-नौ बजे सोकर उठने की है। होटल का चेक-आउट समय साढ़े सात बजे था। मुझसे पहले दीप्ति उठ गयी। चमत्कार! कहने लगी कि उठ, समुद्र तट पर चलकर नहाते हैं। मैंने मना कर दिया। वह आराम से बिना गुस्सा किये चली गयी। महा चमत्कार!!
जल्दी ही वापस लौट आयी - बिना नहाये। बताया कि यह कोरल तट है। नहाना बहुत मुश्किल है। कोरल तटों पर चोट बड़ी आसानी से लगती है और लगती भी ऐसी है कि खून निकल आता है।

Thursday, March 16, 2017

नील द्वीप: भरतपुर बीच और लक्ष्मणपुर बीच

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20 जनवरी 2017
नैचुरल ब्रिज से पैदल मुख्य बाज़ार तक आने में थक गये। गर्मी भी थी और उमस भी। बाज़ार से भरतपुर बीच आधा किलोमीटर दूर है। पहुँच गये। लेटने की जगह मिल गयी और मैं सो गया।
नील द्वीप पर भरतपुर, सीतापुर, लक्ष्मणपुर और रामनगर सब बीच हैं।
मुझे समुद्र तटों का कोई अनुभव नहीं है। न ही यह पता कि फलाँ बीच ख़ूबसूरत है और फलाँ नहीं है। सभी तट एक-जैसे लगते हैं। मुझे न किसी बीच की विशेषता पता है और न ही वहाँ की ख़ूबियाँ। यही बात आपको इन यात्रा-वृत्तांतों में भी दिख रही होगी। अंडमान यात्रा को मैं पूरे अधिकार से नहीं लिख पा रहा हूँ। दिल पहाड़ों और ट्रेनों में ही बसता है ना।
दो घंटे सो लेने के बाद बड़ा अच्छा लगने लगा। यहाँ भीड़ नहीं थी, लेकिन चहल-पहल थी। कुछ दुकानें थीं, जहाँ केवल एजेंट लोग बैठे थे - समुद्री गतिविधियाँ कराने के लिये। बीच तो रेतीला और साफ़-सुथरा था, लेकिन आगे समुद्र में कोरल थे। इसलिये स्कूबा डाइविंग का अच्छा काम हो रहा था। हाई स्पीड़ वाटर स्कूटर वाला लड़कियों को सैर करा रहा था और तब तक समुद्र में कलाबाजियाँ कराता रहता, जब तक कि लड़की की चीख न निकल जाये।

Monday, March 13, 2017

नील द्वीप में प्राकृतिक पुल के नज़ारे

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20 जनवरी 2017
फोनिक्स-बे जेट्टी - हाँ यही नाम है इस जेट्टी का गूगल मैप में। नील और हैवलॉक जाने वाली बोट यहीं से चलती हैं। हमारी आज की नील द्वीप जाने की बुकिंग थी। सुबह सात बजे जहाज को चलना था, हम साढ़े छह बजे ही पहुँच गये। सुरक्षा-जाँच और चेक-इन के बाद वातानुकूलित जहाज में अपनी-अपनी सीटों पर जा बैठे।
दो घंटे की यह यात्रा थी। समुद्र अशांत था - शायद यह शांत ही कभी-कभार होता होगा। बड़ी-बड़ी लहरें आ रही थीं। भारी-भरकम जहाज को भी अच्छी तरह हिला देतीं। जी.पी.एस. चलाकर जहाज की गति नापी। यह बीस किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से चल रहा था। वैसे समुद्री दूरियों को ‘नॉटिकल मील’ में नापते हैं, लेकिन मुझे किलोमीटर ही समझ आता है।
इससे पहले कि हमें समुद्री बीमारी होती और उल्टी आती, हमने मोबाइलों में अपने-अपने पसंदीदा गेम खेलने शुरू कर दिये। मैंने अपने गेम में न जाने कितनी लंबी रेलवे लाइन बिछाकर इस पर ट्रेनें चलायीं और दीप्ति ने ‘सबवे सर्फ़र’ में न जाने कितनी ट्रेनों में टक्कर मारी। इस जहाज पर डेक पर जाने की मनाही थी।

Thursday, March 9, 2017

नॉर्थ-बे बीच: कोरल देखने का उपयुक्त स्थान

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डेढ़ घंटा रॉस द्वीप पर घूमने के बाद हम वापस जेट्टी पहुँच गये। समय की पाबंदी का उदाहरण देखिये - हमारी बोट नंदिनी जेट्टी पर लगायी जा रही थी। अब यह हमें नॉर्थ-बे ले जायेगी।
इसे नॉर्थ-बे आइलैंड़ भी कहा जाता है, लेकिन मैं इसे ‘आइलैंड़’ नहीं कहूँगा। वैसे तो पूरा अंडमान-निकोबार ही द्वीप-समूहों से बना है। पोर्ट ब्लेयर भी एक द्वीप ही है - बहुत बड़ा द्वीप - इसका नाम है दक्षिणी अंडमान। तो यह जो नॉर्थ-बे है ना, यह पोर्ट ब्लेयर वाले मुख्य द्वीप का ही हिस्सा है। यह रॉस आइलैंड़ की तरह अलग से कोई द्वीप नहीं है। इसलिये इसे नॉर्थ-बे द्वीप कहना गलत है। यह दक्षिणी अंडमान द्वीप का एक हिस्सा है और समुद्री-तट होने के कारण इसे ‘नॉर्थ-बे बीच’ कहना ज्यादा उपयुक्त है, ‘नॉर्थ-बे आइलैंड़’ नहीं।
समुद्र में बड़ी उथल-पुथल थी। लहरें नाव को ऊपर उठा देतीं और फिर धड़ाम से नीचे पटक देतीं। इससे इतना पानी छलकता कि नाव के भीतर भी आ जाता।

Monday, March 6, 2017

रॉस द्वीप - ऐसे खंड़हर जहाँ पेड़ों का कब्ज़ा है

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19 जनवरी, 2017
कल जब हम सेलूलर जेल से लौट रहे थे, तो ‘अंडमान वाटर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स’ दिखायी दिया। यही अबरडीन जेट्टी भी है। जेट्टी मतलब ‘बोट-अड्डा’। यहाँ से रॉस द्वीप और नॉर्थ-बे के लिये बोट चलती हैं। चूँकि ये दोनों स्थान पास ही हैं और यहाँ से दिखायी भी देते हैं, इसलिये किसी भी तरह की एड़वांस बुकिंग की आवश्यकता नहीं।
सरकारी बोट भी चलती होगी, जो प्राइवेट से सस्ती होती होगी। लेकिन हमने प्राइवेट बोट चुनी। दोनों स्थानों पर आने-जाने का इनका किराया 550 रुपये प्रति व्यक्ति था। प्रत्येक बोट का अपना एक नाम होता है। हमें जो बोट मिली, उसका नाम था नंदिनी। यही बोट हमें पहले रॉस द्वीप ले जायेगी, फिर नॉर्थ-बे ले जायेगी और आख़िर में वापस अबरडीन जेट्टी भी लायेगी। रॉस द्वीप पर डेढ़ घंटा रुकना था और नॉर्थ-बे पर ढाई घंटे।